कलौंजी लगाएं और सर पर लहलहाते बाल वापस पाएं

महिलाएं ही क्या पुरुष भी आम तौर पर अपने बालों को लेकर काफी चिंतित रहते हैं, आज की आधुनिक शैली और आधुनिक प्रोडक्ट्स ने हमारे शरीर को फायदा पहुंचाने के बजाय नुक्सान ही पहुंचाया है. बहुत कम लोग जानते हैं कि हमारे आसपास ऐसी बहुत सारी चीजें हैं, जिन्हें सही तरीके से खाकर सुन्दर त्वचा, बालों से लेकर अच्छी सेहत का फायदा उठाया जा सकता है.

इन्हीं में शामिल है कलौंजी जिसमें बहुत सारे मिनरल्स और न्यूट्रिएंट्स होते हैं. आयरन, सोडियम, कैल्शियम, पोटैशियम और फाइबर से भरपूर कलौंजी कई प्रकार के रोगों का घर बैठे इलाज है. लगभग 15 एमीनो एसिड वाला कलौंजी शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन की कमी भी पूरी करता है.

बालों को लाभ

कलौंजी के लाभ में से सबसे बड़ा लाभ बालों को होता है. अनहेल्दी लाइफस्टाइल, स्ट्रेस जैसी कई समस्याओं से महिला हो या पुरुष, दोनों के ही साथ बालों के गिरने की समस्या आम हो चुकी है. इसके लिए तमाम तरह के ट्रीटमेंट कराने पर भी फायदा नहीं होता. लेकिन घर में मौजूद कलौंजी इस समस्या के निपटारे में बहुत ही कारगर उपाय है. सिर पर 20 मिनट तक नींबू के रस से मसाज करें और फिर अच्छे से धो लें. इसके बाद कलौंजी का तेल बालों में लगाकर उसे अच्छे से सूखने दें. लगातार 15 दिनों तक इसका इस्तेमाल बालों के गिरने की समस्या को दूर करता है.

कलौंजी ऑयल, ऑलिव ऑयल और मेहंदी पाउडर को मिलाकर हल्का गर्म करें. ठंडा होने दें और हफ्ते में एक बार इसका इस्तेमाल करें. इससे गंजेपन की समस्या भी दूर होती है.

कलौंजी की राख को तेल में मिलाकर गंजे अपने सर पर मालिश करें कुछ दिनों में नए बाल पैदा होने लगेंगे. इस प्रयोग में धैर्य महत्वपूर्ण है.

कलौंजी के अन्य लाभ

डायबिटीज से बचाता है, पिंपल की समस्या दूर, मेमोरी पावर बढ़ाता है, सिरदर्द करे दूर, अस्थमा का इलाज, जोड़ों के दर्द में आराम, आंखों की रोशनी, कैंसर से बचाव, ब्लड प्रेशर करे कंट्रोल.

कलौंजी एक बेहद उपयोगी मसाला है. इसका प्रयोग विभिन्न व्यंजनों जैसे दालों, सब्जियों, नान, ब्रेड, केक और आचार आदि में किया जाता है.
कलौंजी की सब्जी भी बनाई जाती है.
कलौंजी में एंटी-आक्सीडेंट भी मौजूद होता है जो कैंसर जैसी बीमारी से बचाता है.
कलौंजी का तेल कफ को नष्ट करने वाला और रक्तवाहिनी नाड़ियों को साफ़ करने वाला होता है. इसके अलावा यह खून में मौजूद दूषित व
अनावश्यक द्रव्य को भी दूर रखता है. कलौंजी का तेल सुबह ख़ाली पेट और रात को सोते समय लेने से बहुत से रोग समाप्त होते हैं. गर्भावस्था के समय स्त्री को कलौंजी के तेल का उपयोग नहीं कराना चाहिए इससे गर्भपात होने की सम्भावना रहती है.

कलौंजी का तेल बनाने के लिए 50 ग्राम कलौंजी पीसकर ढाई किलो पानी में उबालें. उबलते-उबलते जब यह केवल एक किलो पानी रह जाए तो इसे
ठंडा होने दें. कलौंजी को पानी में गर्म करने पर इसका तेल निकलकर पानी के ऊपर तैरने लगता है. इस तेल पर हाथ फेरकर तब तक कटोरी में पोछें जब तक पानी के ऊपर तैरता हुआ तेल खत्म न हो जाए. फिर इस तेल को छानकर शीशी में भर लें और इसका प्रयोग औषधि के रूप में करें.

आयुर्वेद कहता है कि इसके बीजों की ताकत सात साल तक नष्ट नहीं होती. दमा, खांसी, एलर्जीः एक कप गर्म पानी में एक चम्मच शहद तथा आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह निराहार (भोजन से पूर्व) पी लेना चाहिए, फिर रात में भोजन के बाद उसी प्रकार आधा चम्मच कलौंजी और एक चम्मच शहद गर्म पानी में मिलाकर इस मिश्रण का सेवन कर लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक प्रतिदिन दो बार पिया जाए. सर्दी के ठंडे पदार्थ वर्जित हैं.

मधुमेहः एक कप काली चाय में आधा चाय का चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर सुबह नाश्ते से पहले पी लेना चाहिए. फिर रात को भोजन के पश्चात सोने से पहले एक कप चाय में एक चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर पी लेना चाहिए. चिकनाई वाले पदार्थों के उपयोग से बचें. इस इलाज के साथ अंगे्रजी दवा का उपयोग होता है तो उसे जारी रखें और बीस दिनों के पश्चात शर्करा की जांच करा लें. यदि शक्कर नार्मल हो गई हो तो अंग्रेजी दवा बंद कर दें, किंतु कलौंजी का सेवन करते रहें.

हृदय रोगः एक कप दूध में आधा चम्मच कलौंजी का तेल मिलाकर प्रतिदिन दो बार प्रयोग करें. इस तरह दस दिनों तक उपचार चलता रहे. चिकनाई वाले पदार्थों का सेवन न करें.

नेत्र रोगों की चिकित्साः नेत्रों की लाली, मोतियाबिंद, आंखों से पानी का जाना, आंखों की तकलीफ और आंखों की नसों का कमजोर होना आदि में एक कप गाजर के जूस में आधा चम्मच कलौंजी का तेल दो चम्मच शहद मिलाकर दिन में दो बार सुबह (निराहार) और रात में सोते समय लेना चाहिए. इस प्रकार 40 दिनों तक इलाज जारी रखें. नेत्रों को धूप की गर्मी से बचाएं.

अपच या पेट दर्द में आप कलौंजी का काढा बनाइये फिर उसमे काला नमक मिलाकर सुबह शाम पीजिये. दो दिन में ही आराम देखिये.
कैंसर के उपचार में कलौजी के तेल की आधी बड़ी चम्मच को एक ग्लास अंगूर के रस में मिलाकर दिन में तीन बार लें.

हृदय रोग, ब्लड प्रेशर और हृदय की धमनियों का अवरोध के लिए जब भी कोई गर्म पेय लें, उसमें एक छोटी चम्मच तेल मिला कर लें.

सफेद दाग और लेप्रोसीः 15 दिन तक रोज पहले सेब का सिरका मलें, फिर कलौंजी का तेल मलें.

एक चाय की प्याली में एक बड़ी चम्मच कलौंजी का तेल डाल कर लेने से मन शांत हो जाता है और तनाव के सारे लक्षण ठीक हो जाते हैं.

कलौंजी के तेल को हल्का गर्म करके जहां दर्द हो वहां मालिश करें और एक बड़ी चम्मच तेल दिन में तीन बार लें. 15 दिन में बहुत आराम मिलेगा.

एक बड़ी चम्मच कलौंजी के तेल को एक बड़ी चम्मच शहद के साथ रोज सुबह लें, आप तंदुरूस्त रहेंगे और कभी बीमार नहीं होंगे; स्वस्थ और निरोग रहेंगे .

याददाश्त बढाने के लिए और मानसिक चेतना के लिए एक छोटी चम्मच कलौंजी का तेल 100 ग्राम उबले हुए पुदीने के साथ सेवन करें.

पथरी हो तो कलौंजी को पीस कर पानी में मिलाइए फिर उसमे शहद मिलाकर पीजिये, १०-११ दिन प्रयोग करके टेस्ट करा लीजिये.कम न हुई हो तो फिर १०-११ दिन पीजिये.

अगर गर्भवती के पेट में बच्चा मर गया है तो उसे कलौंजी उबाल कर पिला दीजिये, बच्चा निकल जायेगा.और गर्भाशय भी साफ़ हो जाएगा.

किसी को बार-बार हिचकी आ रही हो तो कलौंजी के चुटकी भर पावडर को ज़रा से शहद में मिलकर चटा दीजिये.

अगर किसी को पागल कुत्ते ने काट लिया हो तो आधा चम्मच से थोडा कम करीब तीन ग्राम कलौंजी को पानी में पीस कर पिला दीजिये, एक दिन
में एक ही बार ३-४ दिन करे.

जुकाम परेशान कर रहा हो तो इसके बीजों को गरम कीजिए ,मलमल के कपडे में बांधिए और सूंघते रहिये.

दो दिन में ही जुकाम और सर दर्द दोनों गायब . कलौंजी की राख को पानी से निगलने से बवासीर में बहुत लाभ होता है.

कलौंजी का उपयोग चर्म रोग की दवा बनाने में भी होता है. कलौंजी को पीस कर सिरके में मिलकर पेस्ट बनाए और मस्सों पर लगा लीजिये. मस्से कट जायेंगे. मुंहासे दूर करने के लिए कलौंजी और सिरके का पेस्ट रात में मुंह पर लगा कर सो जाएँ.

जब सर्दी के मौसम में सर दर्द सताए तो कलौंजी और जीरे की चटनी पीसिये और मस्तक पर लेप कर लीजिये.

घर में कुछ ज्यादा ही कीड़े-मकोड़े निकल रहे हों तो कलौंजी के बीजों का धुँआ कर दीजिये.

गैस/पेट फूलने की समस्या –50 ग्राम जीरा, 25 ग्राम अजवायन, 15 ग्राम कलौंजी अलग-अलग भून कर पीस लें और उन्हें एक साथ मिला दें. अब 1 से 2 चम्मच मीठा सोडा, 1 चम्मच सेंधा नमक तथा 2 ग्राम हींग शुद्ध घी में पका कर पीस लें. सबका मिश्रण तैयार कर लें. गुनगुने पानी की सहायता से 1 या आधा चम्मच खाएं.

महिलाओं को अपने यूट्रस (बच्चेदानी) को सेहतमंद बनाने के लिए डिलीवरी के बाद कलौंजी का काढा ४ दिनों तक जरूर पी लेना चाहिए. काढ़ा बनाने के लिए दस ग्राम कलौंजी के दाने एक गिलास पानी में भिगायें, फिर २४ घंटे बाद उसे धीमी आंच पर उबाल कर आधा कर लीजिये. फिर उसको ठंडा करके पी जाइये, साथ ही नाश्ते में पचीस ग्राम मक्खन जरूर खा लीजियेगा. जितने दिन ये काढ़ा पीना है उतने दिन मक्खन जरूर खाना है.

आपको अगर बार बार बुखार आ रहा है अर्थात दवा खाने से उतर जा रहा है फिर चढ़ जा रहा है तो कलौंजी को पीस कर चूर्ण बना लीजिये फिर उसमे गुड मिला कर सामान्य लड्डू के आकार के लड्डू बना लीजिये. रोज एक लड्डू खाना है ५ दिनों तक , बुखार तो पहले दिन के बाद
दुबारा चढ़ने का नाम नहीं लेगा पर आप ५ दिन तक लड्डू खाते रहिएगा, यही काम मलेरिया बुखार में भी कर सकते हैं.

ऊनी कपड़ों को रखते समय उसमें कुछ दाने कलौंजी के डाल दीजिये,कीड़े नहीं लगेंगे.

भैषज्य रत्नावली कहती है कि अगर कलौंजी को जैतून के तेल के साथ सुबह सवेरे खाएं तो रंग एकदम लाल सुर्ख हो जाता है. चेहरे को सुन्दर व आकर्षक बनाने के लिए कलौंजी के तेल में थोड़ा सा जैतून का तेल मिलाकर चेहरे पर लगाएं और थोड़ी देर बाद चेहरा धो लें. इससे चेहरे के दाग़-धब्बे दूर होते हैं.

नोट : यूं तो ये सारे उपाय आयुर्वेद की किताब से लिए गए हैं और नुक्सान होने की आशंका नगण्य है फिर भी कोई भी उपचार अपनाने से पहले घर के बुजुर्गों की सलाह अवश्य लें, क्योंकि हर शरीर की तासीर अलग होती है, जिससे शरीर कोई विपरीत प्रतिक्रया भी दे सकता है.

कैसे पायें गुलाबी होठ?

क्या आप को किसी महिला के मुलायम गुलाबी होंठ देखकर जलन होती है? कहीं आईने में देखकर आप यह तो नहीं कहती कि काश मेरे होंठ भी मुलायम व गुलाबी होते। अगर हो तो अब आप भी अपने होंठों को दूसरों से ज्यादा आकर्षक व खूबसूरत बना सकती हैं। निम्न बातों पर अमल करने से आपके होंठ खूबसूरत ही नहीं, चमकदार भी लगेंगे

* लिपस्टिक को सीधे ही होंठों पर न लगाएं बल्कि पहले एक अच्छे लिप कलर फिक्सेटिव का इस्तेमाल करें। होंठों पर चैपस्टिक की पतली परत लगाएं। यह लिप कलर को देर तक टिकाए रखता है और होंठों को फटने से भी बचाता है। चैपस्टिक के अलावा टेलकम पाउडर लगाने से भी अच्छे परिणाम प्राप्त हो सकते हैं। यह भी लिपस्टिक को देर तक टिकाए रखता है।

* ज्यादा समय तक लिपकलर को सेट करने के लिए होंठों को ब्लाट करें यानी होंठों पर लिपस्टिक लगाने के बाद हल्का या लूज या प्रेस्ड पाउडर की पतली परत लगाएं, फिर टिशू पेपर को होंठों के बीच रखकर हल्का सा दबाएं। ऐसा करने से अतिरिक्त पाउडर टिशू पेपर पर लग जाएगा। उसके बाद फिर से लिप कलर लगाएं।

* यदि होंठों पर चमक कुछ ज्यादा प्रतीत हो तो थोड़ा सा पाउडर लगाएं, फिर टिशू पेपर लेकर उसे होंठों के बीच रखकर दबाएं। टिशू अतिरिक्त चमक सोख लेगा।

* होंठों को चमक प्रदान करने के लिए लिपस्टिक लगाने के बाद या बिना लिपस्टिक के ही उन पर लिपग्लास लगाएं। यदि अधिक चमक चाहिए तो लिक्विड पिल कलर या लिप गार्ड का प्रयोग करें।

* होंठों को हाईलाइट करने के लिए होंठों के बीच में लिपग्लास लगाएं।

* यदि मैट लिप कलर लगाने के बाद होंठ ड्राई लगें तो लिपकलर लगाने से पहले लिप कलर फिक्सेटिव का प्रयोग करें।

* शाम के समय स्पेशल इफेक्ट्स के लिए सिल्वर, गोल्ड या इरिडेंसेट शेड का लिप कलर व पार दर्शक (शियर) लिपग्लास का प्रयोग करे।

* किसेबल लिप लुक के लिए नेचुरल शेड का लिप कलर प्रयोग करें जिस में आप हर समय सुंदर लगेगी।

* ऐसे लुक के लिए पहले होंठों पर लिप बाम लगाएं। चिकने प्रसाधनों जैसे वैसलीन और अन्य पेट्रोलियम बेस्ड प्रसाधनों आदि के प्रयोग से बचे क्योंकि इन्हें लगाने से लिपस्टिक फैल जाती है। वैक्सी बाम जैसे चैपस्टिक का प्रयोग करे इसे उंगली पर लेकर होंठों पर लगाकर कुछ मिनट तक मसाज करें।

फिर होंठों पर शियर लिपस्टिक और लाइट लिपग्लास का प्रयोग करें। लिपस्टिक को सीधे ही होंठों पर लगाएं। फिर होंठों को आपस में मिलाएं ताकि लिपस्टिक सेट हो सके। लिपग्लास को लिपब्रश से लगाएं और फिर उंगली से एकसार करे।

* अतिरिक्त लिपकलर को हटाने के लिए एक हाथ के पीछे के हिस्से पर किस करें। अतिरिक्त लिपस्टिक उस पर लग जाएगी और लिपकलर भी सेट हो जाएगा।

* लिप लाइनर का प्रयोग – लिपस्टिक लगाने से पहले लिप लाइनर का प्रयोग करें। लाइनर लिपस्टिक से गहरा प्रयोग न करें। इस से लिपस्टिक की चमक फीकी लगेगी और लाइनर ही नजर आएगा। लाइनर का प्रयोग होंठों की आउटलाइन बनाने के लिए करें। इसके लिए लाइनर न्यूट्रल अथवा लिप स्टिक से मैच करता हुआ प्रयोग करें।

सबसे पहले ऊपर के होंठ के बीच से आउट लाइन बनाना शुरू करें। लाइनर से लाइन को ड्रा करते हुए बाहरी कोने तक ले जाएं। नेचुरल लिपलाइन के ऊपर ही लाइनर का प्रयोग करें। फिर लिपकलर लगाएं। लिप पेंसिल को प्रयोग करने से पहले फ्रिज में कुछ देर तक ठंडा होने के लिए रखें। इस से उसे शार्प करने में आसानी होगी।

लिपस्टिक लगाते समय – लिपस्टिक से पहले होंठों पर थोड़ा सा लूज पाउडर या फाउंडेशन लगाएं। ऐसा करने पर लिपस्टिक देर तक सेट रहेगी और होंठ भी ड्राई नहीं लगेंगे। इसके अलावा क्रीमी लिपस्टिक का प्रयोग कर सकती हैं। लिपस्टिक लगाने से पहले दोनों होंठों को स्ट्रेच करें। फिर सेंटर से लिपस्टिक लगाते हुए कार्नर तक जाएं। उसके बाद ब्लाट करें। फिर एक बार लिपस्टिक लगाएं। उस के बाद फिर ब्लाट करें। इससे लिपस्टिक अधिक समय तक होंठों पर टिकी रहती है।

यदि होंठों पर हल्की दरारें पड़ी हों तो लिपस्टिक सपाट लगाने की बजाय उध्र्वाधर लगाएं।

लाल रंग का प्रयोग – कहीं आप इस शेड को लगाते समय झिझकती तो नहीं कि यह आप पर जंचेगा भी या नहीं? वैसे लाल रंग सभी स्किन टोन के लिए काफी ब्राइट होता है, इसलिए रेड के साथ थोड़ा ब्राउन शेड भी मिला लें जो रेड की ब्राइटनेस को काफी कम कर देता है। वैसे बहुत से ऐसे शेड्स हैं जिन्हें आप अपने हिसाब से मिक्स करके लगा सकती हैं और अपने लिप कलर को एक परफेक्ट लिप कलर बना सकती है।

7 दिन में पेट को अंदर करेंगे ये 6 उपाय

मोटापा वो बीमारी है जो पर्सनैलिटी को खराब करने के साथ साथ कई बीमारियों जैसे हाई ब्लडप्रेशर, कमर दर्द, दिल की बीमारी, घुटने में दर्द जैसी बीमारियों को भी न्योता देती है। मोटापा कम करने के लिए लोग डायटिंग, जिम में वर्कआउट आदि करते हैं लेकिन फिर भी वजन कम नहीं कर पाते हैं क्योंकि उनका डाइट प्लान सही नहीं होता है। अगर खाने पर पूरा ध्यान दिया जाए और साथ में वर्कआउट किया जाए तो वजन को

चीनी एक जहर है

👏👏 चीनी एक जहर है जो अनेक रोगों का कारण है, जानिये कैसे...

(1)-- चीनी बनाने की प्रक्रिया में गंधक का सबसे अधिक प्रयोग होता है । गंधक माने पटाखों का मसाला ।

(2)-- गंधक अत्यंत कठोर धातु है जो शरीर मेँ चला तो जाता है परंतु बाहर नहीँ निकलता ।

(3)-- चीनी कॉलेस्ट्रॉल बढ़ाती है जिसके कारण हृदयघात या हार्ट अटैक आता है ।

(4)-- चीनी शरीर के वजन को अनियन्त्रित कर देती है जिसके कारण मोटापा होता है ।

(5)-- चीनी रक्तचाप या ब्लड प्रैशर को बढ़ाती है ।

(6)-- चीनी ब्रेन अटैक का एक प्रमुख कारण है ।

(7)-- चीनी की मिठास को आधुनिक चिकित्सा मेँ सूक्रोज़ कहते हैँ जो इंसान और जानवर दोनो पचा नहीँ पाते ।

(8)-- चीनी बनाने की प्रक्रिया मेँ तेइस हानिकारक रसायनोँ का प्रयोग किया जाता है ।

(9)-- चीनी डाइबिटीज़ का एक प्रमुख कारण है ।

(10)-- चीनी पेट की जलन का एक प्रमुख कारण है ।

(11)-- चीनी शरीर मे ट्राइ ग्लिसराइड को बढ़ाती है ।

(12)-- चीनी पेरेलिसिस अटैक या लकवा होने का एक प्रमुख कारण है।

(13) चीनी बनाने की सबसे पहली मिल अंग्रेजो ने 1868 मेँ लगाई थी ।
उसके पहले भारतवासी शुद्ध देशी गुड़ खाते थे और कभी बीमार नहीँ पड़ते थे ।

(14) कृपया जितना हो सके, चीनी से गुड़ पे आएँ ।

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घरेलू फेस पैक से निखारें खूबसूरती..

बाजार में कई प्रकार की हर्बल क्रीम, फेस वॉश, फेस पैक, माइश्वराइजर जैसे उत्‍पाद उपलब्‍ध हैं। लेकिन इनकी कीमत बहुत ज्‍यादा होती है। और फिर गुणवत्ता को लेकर चिंता तो फिर भी बनी रहती है।

इसलिए इन उत्‍पादों से ज्‍यादा विश्‍वास घरेलू नुस्‍खों पर किया जा सकता है। इसके अलावा घर में बनाये गये फेस पैक के साइड इफेक्‍ट की गुंजाइश कम होती है। आइए हम आपको बताते हैं कि कैसे घर बैठे

आयुर्वेदिक दोहे |

۞ ∥ आयुर्वेदिक दोहे ∥ ۞

1. दही मथें माखन मिले, केसर संग मिलाय, होठों पर लेपित करें, रंग गुलाबी आय..

2. बहती यदि जो नाक हो, बहुत बुरा हो हाल, यूकेलिप्टिस तेल लें, सूंघें डाल रुमाल..

3. अजवाइन को पीसिये , गाढ़ा लेप लगाय, चर्म रोग सब दूर हो, तन कंचन बन जाय..

4. अजवाइन को पीस लें , नीबू संग मिलाय, फोड़ा-फुंसी दूर हों, सभी बला टल जाय..

5. अजवाइन-गुड़ खाइए, तभी बने कुछ काम, पित्त रोग में लाभ हो, पायेंगे आराम..

6. ठण्ड लगे जब आपको, सर्दी से बेहाल, नीबू मधु के साथ में, अदरक पियें उबाल..

7. अदरक का रस लीजिए. मधु लेवें समभाग, नियमित सेवन जब करें, सर्दी जाए भाग..

8. रोटी मक्के की भली, खा लें यदि भरपूर, बेहतर लीवर आपका, टी.बी भी हो दूर..

9. गाजर रस संग आँवला, बीस औ चालिस ग्राम, रक्तचाप हिरदय सही, पायें सब आराम..

10. शहद आंवला जूस हो, मिश्री सब दस ग्राम, बीस ग्राम घी साथ में, यौवन स्थिर काम..

11. चिंतित होता क्यों भला, देख बुढ़ापा रोय, चौलाई पालक भली, यौवन स्थिर होय..

12. यलाल टमाटर लीजिए, खीरा सहित सनेह, जूस करेला साथ हो, दूर रहे मधुमेह..

13. प्रातः संध्या पीजिए, खाली पेट सनेह, जामुन-गुठली पीसिये, नहीं रहे मधुमेह..

14. सात पत्र लें नीम के, खाली पेट चबाय, दूर करे मधुमेह को, सब कुछ मन को भाय..

15. सात फूल ले लीजिए, सुन्दर सदाबहार, दूर करे मधुमेह को, जीवन में हो प्यार..

16. तुलसीदल दस लीजिए, उठकर प्रातःकाल, सेहत सुधरे आपकी, तन-मन मालामाल..

17. थोड़ा सा गुड़ लीजिए, दूर रहें सब रोग, अधिक कभी मत खाइए, चाहे मोहनभोग.

18. अजवाइन और हींग लें, लहसुन तेल पकाय, मालिश जोड़ों की करें, दर्द दूर हो जाय..

19. ऐलोवेरा-आँवला, करे खून में वृद्धि, उदर व्याधियाँ दूर हों,जीवन में हो सिद्धि..

20. दस्त अगर आने लगें, चिंतित दीखे माथ, दालचीनि का पाउडर, लें पानी के साथ..Akkii..

21. मुँह में बदबू हो अगर, दालचीनि मुख डाल, बने सुगन्धित मुख, महक, दूर होय तत्काल..

22. कंचन काया को कभी, पित्त अगर दे कष्ट, घृतकुमारि संग आँवला, करे उसे भी नष्ट..

23. बीस मिली रस आँवला, पांच ग्राम मधु संग, सुबह शाम में चाटिये, बढ़े ज्योति सब दंग..

24. बीस मिली रस आँवला, हल्दी हो एक ग्राम, सर्दी कफ तकलीफ में, फ़ौरन हो आराम..

25. नीबू बेसन जल शहद, मिश्रित लेप लगाय, चेहरा सुन्दर तब बने, बेहतर यही उपाय..

26. मधु का सेवन जो करे, सुख पावेगा सोय, कंठ सुरीला साथ में, वाणी मधुरिम होय.

27. पीता थोड़ी छाछ जो, भोजन करके रोज, नहीं जरूरत वैद्य की, चेहरे पर हो ओज..

28. ठण्ड अगर लग जाय जो नहीं बने कुछ काम, नियमित पी लें गुनगुना, पानी दे आराम..

29. कफ से पीड़ित हो अगर, खाँसी बहुत सताय, अजवाइन की भाप लें, कफ तब बाहर आय..

30. अजवाइन लें छाछ संग, मात्रा पाँच गिराम, कीट पेट के नष्ट हों, जल्दी हो आराम..

31. छाछ हींग सेंधा नमक, दूर करे सब रोग, जीरा उसमें डालकर, पियें सदा यह भोग..।

कृपया इस मैसेज को अपने परीजनो और अपने मित्र गण से अवगत कराए..

फ़ैट कम करने के 10 प्रोफ़ेशनल तरीक़े | Lose Fat On Stomach

फ़ैट यानि अतिरिक्त वसा कम करने के लिए लोग कई जतन करते हैं – जैसे डाइटिंग या जिम ज्वाइन करना आदि। यहां तक कि कई लोग तो एक समय का भोजन भी छोड़ देते हैं, परंतु सकारात्मक परिणाम देखने को नहीं मिलते हैं। आपको बता दूँ कि फ़िल्मी दुनिया के सितारे इन्हीं प्रोफेशनल तरीकों को अपनाकर अपना वज़न कुछ दिनों में कम लेते हैं। आज हम

शीघ्रपतन, धातु क्षीणता व धातु स्राव के रामबाण घरेलु उपाय | Premature Ejaculation


शीघ्र गिर जाने को शीघ्रपतन कहते हैं। सेक्स के मामले में यह शब्द वीर्य के स्खलन के लिए, प्रयोग किया जाता है। पुरुष की इच्छा के विरुद्ध उसका वीर्य अचानक स्खलित हो जाए, स्त्री सहवास करते हुए संभोग शुरू करते ही वीर्यपात हो जाए और पुरुष रोकना चाहकर भी वीर्यपात होना रोक न सके, अधबीच में अचानक ही स्त्री को संतुष्टि व तृप्ति प्राप्त होने से पहले ही पुरुष का वीर्य स्खलित हो जाना या निकल जाना, इसे शीघ्रपतन होना कहते हैं। इस व्याधि का संबंध स्त्री से नहीं होता, पुरुष से ही होता है और यह व्याधि सिर्फ पुरुष को ही होती है।

शीघ्र पतन की सबसे खराब स्थिति यह होती है कि सम्भोग क्रिया शुरू होते ही या